By - Monu Kumar
भारत वर्ष एक विविधताओं से भरा देश है जहाँ पर कई नाम आसमान की बुलंदियों पर पहुंचे हैं l
पर कई नाम ऐसे भी हैं जिनकी अभी कोई पहचान नहीं है, किन्तु उनका काम इतना उम्दा है, की इस कथन में कोई दो राय नहीं हैं की कल वो उभरते सितारे भी बन सकते हैं l
ऐसे ही एक व्यक्ति से आज हम आपका परिचय करवाएंगे जो भारत के प्रसिद्द व्यंजन, कचौरी-आलू को शुद्ध भारतीय शैली में, अपने ग्राहकों को परोसते हैं और ग्राहक भी बड़े चाव से इनके कचौरी आलू खाते हैं l
अनिल चौहान, ग़ाज़ियाबाद के कविनगर रामलीला मैदान के निकट ही, बृजवासी प्रतिष्ठान के द्वारा कचौरी-आलू का व्यवसाय करते हैं l गौर करने वाली बात ये है की ठेला होने के बावजूद आसपास काफी सफाई है और जो कोई भी इनका कचौरी-आलू एक बार खा ले वो बार बार इनके यहाँ भारत के इस विशिष्ट व्यंजन का स्वाद लेने आता है l
अनिल ने कहा की मथुरा के हैं, और वहां कचौरी-आलू देश-विदेश से आये लोग बड़े ही चाव लेकर खाते हैं, मथुरा का वही स्वाद वो दिल्ली-एनसीआर में भी देना चाहते हैं, उनके ग्राहक एक आम व्यक्ति से लेकर बड़ी बड़ी कोठियों में रहने वाले नगर-सेठ हैं l
अनिल जल्दी ही अपने व्यवसाय का विस्तार भी करने वाले है एवं ग़ाज़ियाबाद के सुदूर इलाकों जैसे की राजनगर एक्सटेंशन,इंडिरापुरम में भी अपनी दूकान खोलने वाले हैं l